"जीने का हुनर"

बिखरी हुई मुस्कुराहट को समेटना सीख रही हूं,
अपने आप से बातें मैं करना सीख रही हूं,
किसी ने मुझसे पूछा.....
क्या करती हो सारा दिन.....
मैंने मुस्कुरा कर बोला......
जिंदगी जीने का हुनर मैं सीख रही हूं।

सामने से आवाज आई.....
मुझे भी सीखना है यह हुनर,
क्या होगी इसकी फीस.....
मैंने बोला.....
इम्तिहान होंगे जिंदगी के हर मोड़ पर, बस मुस्कुरा कर उनको पास करना होगा।
अगर नहीं कर सके तुम इम्तिहान पास, तो वही होगी तुम्हारी अंतिम हार.....
जिंदगी ना देगी मौका अगला इम्तिहान देने का, इसलिए बिखरी हुई मुस्कुराहट को समेटना सीख रही हूं, अपने आप से बातें में करना सीख रही हूं।

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