मजदूर हूं इसलिए मजबूर हूं
मजदूर हूं इसलिए मजबूर हूं , कहने को तो समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के नाम से भी मशहूर हूं...................... दो रोटी का फलसफा, उसे इतनी दूर ले आएगा, मुसीबत की घड़ी में फिर वह, वापिस लौट न पाएगा। फिर हादसे और मौतों से लाशों का ढेर लग जाएगा, फिर कहानी दोहराई जाएगी, और एक नई खबर अखबार में आएगी। (कि फिर एक गाड़ी ने मजदूरों को कुचला)....